Success Story: पिता करते हैं शादियों में बर्तन साफ, खुद ने भी करी मजदूरी, आँखों में आँसू आ जाएंगे तीसरे प्रयास में नीट में बाजी मारने वाले लड़के की कहानी

NEET UG 2025 का परिणाम घोषित हो चुका है और लाखों छात्रों में से कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने तमाम कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों को मात देते हुए डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया। राजस्थान के श्रवण कुमार की कहानी उन्हीं में से एक है। आइए जानते हैं श्रवण की जीत की कहानी है।

Success Story: NEET UG 2025 का परिणाम घोषित हो चुका है और लाखों छात्रों में से कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने तमाम कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों को मात देते हुए डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया। राजस्थान के श्रवण कुमार की कहानी उन्हीं में से एक है। आइए जानते हैं श्रवण की जीत की कहानी है।

इस वर्ष 2209318 अभ्यर्थी नीट यूजी 2025 परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 12,36,531 अभ्यर्थी सफल हुए। इनमें से कुछ अभ्यर्थियों ने अनेक कठिनाइयों, चुनौतियों और संसाधनों की कमी के बावजूद, केवल कड़ी मेहनत और समर्पण के बल पर सफलता हासिल की है। श्रवण कुमार मूल रूप से राजस्थान के बालोतरा जिले के बायतु क्षेत्र के रहने वाले हैं।

श्रवण एक गरीब किसान परिवार से आता है। उनके पिता रेखा राम शादियों में बर्तन साफ ​​करते हैं और परिवार का भरण-पोषण करने के लिए खेती भी करते हैं। रेखा राम अपने बेटे का पालन-पोषण करने और उसके डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए संघर्ष करती है। परिणाम यह होता है कि उसका बेटा गरीबी और संघर्ष पर विजय प्राप्त कर लेता है।

परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण श्रवण ने सरकारी स्कूल से 10वीं की पढ़ाई पूरी की। बाद में घर की हालत को देखते हुए उन्होंने मजदूरी करना शुरू कर दिया, लेकिन इस स्थिति में भी श्रवण ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। उन्होंने सरकारी स्कूल से 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की और तभी से NEET की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि श्रवण को नीट में पहले और दूसरे प्रयास में असफलता मिली, लेकिन उन्होंने अपना धैर्य और साहस नहीं खोया और तीसरी बार कड़ी मेहनत की।

श्रवण ने तीसरे प्रयास में NEET पास कर लिया। उन्होंने 720 में से 556 अंक प्राप्त किए और अखिल भारतीय रैंक (एआईआर) 9754 हासिल की। ​​श्रवण अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं। श्रवण एक अत्यंत गरीब किसान परिवार से हैं। पिता रेखाराम, खेतों में काम करने के साथ-साथ शादियों में जूठे बर्तन धोने का कार्य करते हैं। प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल में हुई। 10वीं के बाद श्रवण ने पढ़ाई के साथ-साथ मजदूरी भी शुरू कर दी, ताकि घर चलाने में मदद कर सकें।

Sunil Yadav

सुनील यादव पिछले लगभग 15 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों में ( India Tv, Times Now,… More »
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